हे मेरे नन्हें दीपक - कविता - साई अनमोल

हे मेरे नन्हें दीपक - कविता - साई अनमोल | Hindi Kavita - Hey Mere Nanhen Deepak - Sai Anmol
हे मेरे नन्हें दीपक
तुझे जलना बारम्बार!

तम में यह जीवन पला है
पलकों पर आँसू गला है,
इस पुतली की वर्ती से ही तुझको करना प्यार!
तुझे जलना बारम्बार!

रजनी की अरूप शिला पर
सीमा की ज़ंजीर गलाकर,
धोना है तुझको आँसू से दुःख का पारावार!
तुझे जलना बारम्बार!

अपनी तू लौ को सहला ले
विद्युत जैसे ताप बढ़ा ले,
अब तेरी ही विजय होगी, होगी जीवन की क्षार!
तुझे जलना बारम्बार!

देवों ने हैं फूल लुटाए
तुझको ही अब पलक बिछाए,
तेरी ही जलती किरणों से जागेगा यह संसार!
तुझे जलना बारम्बार!


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