साई अनमोल - अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
हे मेरे नन्हें दीपक - कविता - साई अनमोल
बुधवार, जुलाई 01, 2026
हे मेरे नन्हें दीपक
तुझे जलना बारम्बार!
तम में यह जीवन पला है
पलकों पर आँसू गला है,
इस पुतली की वर्ती से ही तुझको करना प्यार!
तुझे जलना बारम्बार!
रजनी की अरूप शिला पर
सीमा की ज़ंजीर गलाकर,
धोना है तुझको आँसू से दुःख का पारावार!
तुझे जलना बारम्बार!
अपनी तू लौ को सहला ले
विद्युत जैसे ताप बढ़ा ले,
अब तेरी ही विजय होगी, होगी जीवन की क्षार!
तुझे जलना बारम्बार!
देवों ने हैं फूल लुटाए
तुझको ही अब पलक बिछाए,
तेरी ही जलती किरणों से जागेगा यह संसार!
तुझे जलना बारम्बार!
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

