तू ज़िंदा है! - कविता - संजय राजभर 'समित'
मंगलवार, जून 10, 2025
उठ चल! और लड़
गर साँस लेता हुआ तू ज़िंदा है
तो याद रख
तुझे आगे बढ़ना ही पड़ेगा,
गर थक गया है तो माँझी को देख
गर अंधा है तो लुइ ब्रेल को देख
गर अपंग है तो स्टीफन हाकिंग को देख
ऐवरेस्ट पर चढ़ती हुई अरूणिमा सिन्हा हो देख
यह लोग आज भी ज़िंदा हैं
तू ज़िंदा है!!
तो ज़िंदा रहना सीख।
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