रूशदा नाज़ - वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
ख़ुद को ढूँढ़ने की राह - कविता - रूशदा नाज़
मंगलवार, जून 10, 2025
हर शख़्स को यादों में रोते देखा है व्यथित होकर ख़ुद को सम्भालतें देखा है
ख़ुद से प्यार करने की सलाह सब देते है
प्रेम में बिखरने के बाद ये बदलाव आते है
कभी रोया बहुत टूटा निभाया भी बहुत दिल से
पर न जाने क्यूँ हमारे हिस्से कभी कुछ नहीं आया
शिद्दत से किया प्यार, ख़ुद को समर्पित कर डाला
बदले में कुम्हलाने का अवसर दे डाला
टूटने, बिखरने का एहसास जीवन को सँवारने आते हैं
इसी को मैंने ज़िंदगी का मक़सद बना डाला।
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