शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' - फ़तेहपुर (उत्तर प्रदेश)
पत्नी की मृत्यु पर - कविता - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
रविवार, जुलाई 07, 2024
खो दिया एक मंत्राणी
मातृत्व का स्वरूप
शिव सा विषपान कर
जिओ और जीने दो की परिभाषा
परीक्षा की घड़ी में
परिवार को जोड़ने का सूत्र
सिखा गई स्वाभिमान
तपस, अनुशासन
और सिखा गई ―
पत्नी धरती है
सागर की गहराई का गांभीर्य
एवं
आकाश छूने की चाहत
और स्वाभिमान के आयाम।
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