माँ ब्रह्मचारिणी - गीत - उमेश यादव
सोमवार, अक्टूबर 16, 2023
ब्रह्मचारिणी हे माँ दुर्गे, तप करने की शक्ति दो।
ज्योतिर्मयि हे मातु भवानी, चरणों में अनुरक्ति दो॥
विश्व रचयिता हे जगदम्बा, सारे विद्याओं की ज्ञाता।
सफल करो जीवन हे अम्बे, कृपा करो याचक हूँ माता॥
त्याग और वैराग्य बढ़ाओ, चरणों की माँ भक्ति दो।
ब्रह्मचारिणी हे माँ दुर्गे, तप करने की शक्ति दो॥
तपश्चारिणी, धर्मचारिणी, ब्रह्मशक्तिमयी हो माता।
माल कमंडलु शोभित माते, सदविवेक नर तुमसे पाता॥
महादेवि हे जगजननी माँ, सधे भक्ति वह युक्ति दो।
ब्रह्मचारिणी हे माँ दुर्गे, तप करने की शक्ति दो॥
संयम सेवा सदाचार को, जीवन का आधार बना दो।
दुःख कष्टों से मुक्ति मिले माँ, शान्तिमयि संसार बसा दो॥
त्रिभुवन सुंदरी हे माँ अम्बे, भव बंधन से मुक्ति दो।
ब्रह्मचारिणी हे माँ दुर्गे, तप करने की शक्ति दो॥
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

