नरेन्द्र सोनकर 'कुमार सोनकरन' - प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
तुम्हें जब भी देखा - कविता - नरेन्द्र सोनकर 'कुमार सोनकरन'
सोमवार, अगस्त 21, 2023
तुम्हें
जब भी देखा
बस तुम्हें देखा
एकटक देखा
जी भर देखा
होकर देखा
खोकर देखा
तुम में
तुम्हें
जब भी देखा
तो नहीं देखा
घर
परिवार
समाज
नहीं देखा
कि क्या कहेंगे लोग
क्या होगा मेरा मज़ाक
तुम्हें
जब भी देखा
तो नहीं देखा
उद्धरण
नतीजा
सबक़
नहीं देखा
अतीत
वर्तमान
भविष्य
नहीं देखा
लोकोक्तियाँ
क़िस्से
मुहावरे
नहीं देखा
अर्थ
काम
समय
नहीं देखा
नहीं देखा
सेहत
शरीर
स्वार्थ
नहीं देखा
तुम्हें
जब भी देखा
तो तुम्हें देखा
तुम्हें
जब भी देखा
तो देखा
आश्चर्य से
लय से
भय से।
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