राजेश 'राज' - कन्नौज (उत्तर प्रदेश)
प्रकाशन - कविता - राजेश 'राज'
बुधवार, जून 14, 2023
जाने क्या ढूँढ़ती हैं
तुम्हारी आँखें मुझमें
तुमसे पूछ्ना चाहता हूँ
पर नहीं सूझता कोई प्रश्न
जिससे देखें तुझमें
और ज्ञात हो जाए
जिज्ञासा तुम्हारी॥
तुम्हारे ओठों के कोरों पर
सुसज्जित हैं ढेरों लालसाएँ
जिनके समाधान हेतु
तुम प्रयासरत निरन्तर
अपनी थीसिस पूर्ण करने को
शायद कुछ संदर्भ
खोजती हो मुझमें॥
मेरे जीवन के पन्ने
आहिस्ता-आहिस्ता पलट
संभावित संकेत
अपने हृदय के कैनवास पर
अपने दक्ष हाथों से
सहेज रही हो॥
निकट भविष्य में शोध
प्रकाशन का निर्णय
शायद कर रही हो
मेरी सहर्ष स्वीकृति है
कि तुम नवीन प्रयोग कर
अपना शोधकार्य पूर्ण करो
और प्रकाशित हो जाऊँ मैं॥
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