डॉ॰ नेत्रपाल मलिक - अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
नहीं रोया कभी पशु - कविता - डॉ॰ नेत्रपाल मलिक
गुरुवार, जून 29, 2023
नहीं रोया कभी पशु
उसने
नहीं किसी का विश्वास तोड़ा
नहीं कभी वो झूठ बोला
नहीं किसी को धोखा दिया
नहीं कभी विद्रोह किया
कर दिया
अपना जीवन उसके नाम
दिया जिसने
जल, भोजन
आश्रय धाम।
नहीं रोया कभी वृक्ष
उसने
नहीं किसी से कुछ लिया
नहीं किसी को पीड़ा दी
नहीं किसी का मान हरा
नहीं किसी का धन धरा
कर दिया
जीवन अर्पण उसके नाम
आ गया शरण में
जो छाया के नाम।
नवजात शिशु रोया
उसे पता है
उसे उसके पद से गिरा दिया
उसे आदमी बना दिया।
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