मोमबत्ती - कविता - इशिका चौधरी

जलती है एक मोमबत्ती
जैसे उम्मीद की नई किरण जलती है,
आशा के दरवाजे पर
जैसे नई बगिया सी महकती है।

जीवन रूपी समान लौं
एक नया रास्ता दिखाती है,
महक जाता है घर सारा 
जब एक कोने से कहीं 
जीवन की आशा नज़र आती है।

अंत तक जो धागा साथ रहें
ऐसा मज़बूत सा ये जीवन हो,
अँधकार को जो दूर मिटा दे 
ऐसा नया सा एक दर्पण हो।

इशिका चौधरी - ग़ाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश)

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