देश प्रेम - नित छंद - महेन्द्र सिंह राज

प्रभू के दरबार में,
सत्य के नित सार में।
मेरा मन लगा रहे,
सभी लोग सगा रहे।।

सदा सत्य जीत रहा,
वीर न भयभीत रहा।
पी लिया दृगलोर को,
रोक हृदय हिलोर को।।

शांति जनित प्रभा उठी,
व मुस्कुरा सभा उठी।
ख़ुद को तोलने लगे,
सु वीर बोलने लगे।।

मोह माया त्याग कर,
दिवस रात्रि जाग कर।
युद्ध में तल्लीन है,
हृदय नहीं मलीन है।।

भारत माँ सपूत हैं,
वीर माँ के पूत हैं।
देश की वो आन पर,
जान देगें शान पर।।

चाहना निज मान की,
जय हो राष्ट्र गान की।
ध्वजा कभी झुके नहीं,
वीर कभी रुके नहीं।।

मरे तो होंगे अमर,
स्वदेश प्रेम की डगर।
मेरे ख़्याल शुद्ध हैं,
सभी जने प्रबुद्ध हैं।।

महेंद्र सिंह राज - चन्दौली (उत्तर प्रदेश)

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