मेरे गुरुजी सबसे अच्छे - बाल कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव

आँखों मे चश्मा चमक रहा,
है गेहुँआ रंग।
धोती कुर्ता पहन कर आते,
अजब निराले ढंग।।
पतली छड़ी साथ वो लाते,
जब कक्षा में आते।
सब डर जाते देख छड़ी को,
दौड़ दुबक हम जाते।।
फिर कहते एक पाठ निकालो,
मोनू जरा पढ़ो तुम,
ध्यान कहाँ है प्यारे बच्चे,
क्यों बैठे हो तुम गुमसुम।।
मोनू भैया थर थर काँपे,
कुछ बोल ना पाए।
आँखों मे चमक सी आई,
सुब्रत सर जब आए।।
सुब्रत सर जब बोले सर से,
दूर छड़ी तुम फेंको।
अच्छे प्यारे बच्चे है ये,
फिर होशियारी देखो।।
सर बोले फेंक छड़ी को,
डर कर कभी पढ़ो मत।
अच्छी बातें अपना लो,
गंदे कामों की छोड़ो लत।।
कक्षा बिल्कुल सुधर गई,
जम कर नाम कमाया।
नाम हो गया मेरे सर का,
पुरुस्कार भी पाया।।

डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव - जालौन (उत्तर प्रदेश)

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