ऋचा तिवारी - रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
नई सुबह - कविता - ऋचा तिवारी
शुक्रवार, अगस्त 20, 2021
ये ज़िंदगी की बात है,
तू आज क्यूँ उदास है।
क़दम तेरे जो बढ़ चले,
तो शोक कैसा आज है।
ये वक़्त की ही बात है,
काली अँधेरी रात है।
ये रात बीत जाने दो,
नई सुबह तेरे साथ है।
जो राह में चले क़दम,
तो कोशिशें न करना कम।
हवा के रुख़ को देख कर,
न रास्ते बदलना तुम।
संभल संभल के चल ज़रा,
तू ज़िंदगी का ले मज़ा।
मिलेंगी सारी मंज़िलें,
बस हार कर न बैठना।
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