सुषमा दीक्षित शुक्ला - राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
तुम्हारे इश्क़ को ही पूजती हूँ - ग़ज़ल - सुषमा दीक्षित शुक्ला
सोमवार, जुलाई 12, 2021
अरकान : मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
तक़ती : 1222 1222 122
तुम्हारे इश्क़ को ही पूजती हूँ।
मग़र तक़दीर से मैं जूझती हूँ।।
सजाया था कभी जो फूल लव पे,
महक तेरी उसी में सूँघती हूँ।
भले मिल जाए मुझको मौत भी अब,
फ़क़त तुझको हमेशा ढूँढती हूँ।
दिखे जलता भले ही आशियाना,
मग़र तुझको कभी ना भूलती हूँ।
तुम्हीं हो रूह की ताक़त तुम्हीं मंज़िल,
तुम्हें मैं ज़िन्दगी में खोजती हूँ।
तुम्हीं फ़रियाद में शामिल रहे हो,
तुम्हें सुषमा ख़ुदा मैं मानती हूँ।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

