प्रशान्त "अरहत" - शाहाबाद, हरदोई (उत्तर प्रदेश)
सुजाता ने पुकारा है - ग़ज़ल - प्रशान्त 'अरहत'
मंगलवार, जुलाई 27, 2021
अरकान: मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन
तक़ती: 1222 1222 1222 1222
तुम्हारी याद से ही हौसला बढ़ता हमारा है,
बहुत नज़दीक कश्ती के हमारी अब किनारा है।
हमारी ज़िंदगी की ये बहुत ही तेज़ धारा है,
मुझे केवल यहाँ अपनी ही बाहों का सहारा है।
जिसे सब लोग कहते थे कि ये लड़का नकारा है,
उसे अब लोग कहते हैं कि वो भाई हमारा है।
मेरा भारत हिमालय और सागर तक यहाँ फैला,
यहाँ घाटी यहाँ नदियाँ यहाँ अद्भुत नज़ारा है।
सभी मज़हब यहाँ मिलकर सभी के साथ रहते हैं,
तभी तो देश ये हमको हमारी जाँ से प्यारा है।
जहाँ तुम शौक़ में कुत्ते घरों में पाल लेते हो,
वहाँ ही रोड पर बच्चा बहुत भूखा बेचारा है।
तुम्हें तो तैरना भी सीखना होगा यहाँ रहकर,
हमारे यार ये दुनिया नहीं है इक शिकारा है।
बड़ी हसरत भरी आँखें बहुत ही ख़ूबसूरत हैं,
मिला हूँ आज फिर से तो उन्हें जी भर निहारा है।
हवाएँ आज भी कहती हमारे कान में आकर,
कि तुमको आज भी 'अरहत' सुजाता ने पुकारा है।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

