तुम हो मेरे हमेशा - कविता - ममता रानी सिन्हा

और जब कुछ नहीं है दौलत वो,
कह पाएँ या फिर दिखा पाएँ जो,
तब भी सबकुछ ही है मेरे पास,
क्योंकि तुम हो मेरे पास हमेशा।

तुम्हारे जो बेशक़ीमती कुछ पल हैं,
वो उमंगों से भरते मेरा कल हैं,
चारों तरफ़ अपनो की महफ़िल है,
मुझे चाहने वाला तुम्हारा दिल है।

और जब कुछ नहीं है दौलत वो...

ये तुम्हारी कहकहों भरी बातें हैं,
वही तो हमारी सुकून से भरी रातें हैं,
ठिठोलीयों सी कुछ तुम्हारी जो आँखें हैं,
जैसे मुझे ही ढूँढ़ें और मुझे ही ताकें हैं।

और जब कुछ नहीं है दौलत वो...

तुम्हारी ये हँसी ये खुशी ये दीवानापन,
और अपनों के लिए इतना अपनापन,
हमारा ये प्यारा रिश्ता के सदियों का,
यही तो ख़जाना है मेरी खुशियों का।

और जब कुछ नहीं है दौलत वो...

खिलखिलाता आँगन हँसते बच्चे हैं,
यही उन्नति समृद्धि के सच्चे रस्ते हैं,
और जो बच्चों की चुहलबाजियाँ हैं,
वही तो हमारे प्यार की दुनिया हैं।

और जब कुछ नहीं है दौलत वो...

मैं सदा माँगूँ की परमपिता ये वर दें,
हर जन्म तुमसे ही मेरा जीवन भर दें,
खुशियोँ को हम दौलत से ना तोलें,
सभीं से बस प्रेम भरे दो बोल बोलें।
घर साथ समाज भी रहे सुखी सम्पन्न,
खुशियाँ शांति और प्रेम बसे जन-जन।

और जब कुछ नहीं है दौलत वो...

ममता रानी सिन्हा - रामगढ़ (झारखंड)

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