विनय "विनम्र" - चन्दौली (उत्तर प्रदेश)
आश्वासन का वसंत - कविता - विनय "विनम्र"
शनिवार, फ़रवरी 27, 2021
मुझे आश्वासन में मत बाधों
बस धीरे-धीरे चलनें दो,
सागर से निर्मित नमक नहीं हूँ,
धीरे-धीरे गलने दो।
तुम वसंत में नव पल्लव के
गीत ग़ज़ल के शौकीन हो
मैं पतझड़ के राग का कायल
हवा के रौ में बहनें दो।
तुम जीवन मंथन में केवल
अमृत ख़ातिर तड़प रहे हो
गरल की मात्रा यहाँ अधिक है,
विष-पान मुझे हीं करने दो।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

