बढ़ते ही जाएँगे - कविता - कुन्दन पाटिल

दिन रात खूब हम
पढ़ाई करते जाएँगे।
माता पिता का नाम
जगत में चमकाएँगे।
गुरूजनों की अंकाक्षा
पुरी कर दिखाएँगे।
उत्कृष्ठ श्रैणी में
अपना स्थान लाएँगे।
हर इम्तिहान को हम
पास कर दिखाएँगे।
आगे ही आगे हम
बढ़ते चले जाएँगे।।

कुन्दन पाटिल - देवास (मध्यप्रदेश)

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