जीवन में संयम व संकल्प ज़रूरी - आलेख - सुषमा दीक्षित शुक्ला

संसार की सफलताओं का मूल मंत्र उत्कृष्ट मानसिक शक्ति ही होता है जिसमें दो प्रमुख मानसिक शक्तियां मानी जाती हैं एक तो दृढ़ संकल्प शक्ति और दूसरी संयम की शक्ति है।
इसी की प्रबलता से संसार में व्यक्ति कोई भी वस्तु प्राप्त कर सकता है।
जीवन निर्माण में प्रत्येक क्षेत्र में संकल्प शक्ति  व संयम को विशेष स्थान मिला है। संकल्प शक्ति की महिमा के सामने सभी शक्तियां झुक जाते हैं। हम कह सकते हैं कि संकल्प शक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है।

हमारे जीवन में संकल्प शक्ति का बड़ा ही महत्व है। इसी से व्यक्ति के जीवन का निर्माण होता है। व्यक्ति अपने जीवन को परिवर्तन करके नया रंग भर सकता है। निम्न स्तर से महान व्यक्ति बन सकता है।
संयम का पाठ तो हमेशा से ही विश्व के महानतम लोंगो ने अपने आचरण द्वारा इस संसार को पढ़ाया है, चाहे वो श्री राम हो या भीष्मपितामह या फिर महात्मा गाँधी।
संयम में अभूतपूर्व शक्ति निहित होती है जो असंम्भव को भी संम्भव में बदलती रही है। इन्हें ही क्रांतिवीर या क्रांतिदूत कहते हैं, जो आदिकाल से ही अपने संयम और संकल्प की ताकत के जरिये हवाओं का रुख भी मोड़ते रहे हैं।

हम जो भी इच्छा प्रकट करते हैं वह दो प्रकार की होती है एक सामान्य इच्छा व एक विशेष इच्छा। विशेष इच्छा ही जब उत्कृष्ट एवं प्रबल हो जाती है उसी को संकल्प कहते हैं।
हम जो भी क्रिया करते हैं उसके तीन साधन हैं शरीर, वाणी और मन। क्रिया वाणी और शरीर में आने से पहले मन में होती है, अर्थात कर्म का प्रारंभ मानसिक ही होता है। हम मन में बार-बार आवृत्ति करते हैं कि उसको ये बोलूँगा, यह कार्य करूँगा, उसके पश्चात ही वाणी से बोलते हैं फिर से करते हैं। मन का ये दोहराना ही संकल्प है।

व्यक्ति का जीवन उत्कृष्ट, आदर्शमय होगा या निकृष्ट होगा यह उसकी इच्छाशक्ति, संकल्प अथवा विचार व संयम शक्ति से ही निर्धारित होता है।
संकल्प शक्ति व संयम के माध्यम से बड़े से बड़े कार्य में समर्थ हो जाते हैं

सुषमा दीक्षित शुक्ला - राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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