उठी कलम नवलेख को , देश प्रेम की गुंज।।
देश बने जीवन कला , देश बने अरमान।
राष्ट्र प्रगति समझें प्रगति, देश आत्म सम्मान।।
बिना राष्ट्र नौका समा, जीवन बिन पतवार।
दिशा दशा निर्भर वतन , एक राष्ट्र परिवार।।
जीएँ हरपल जिंदगी , मानव जन कल्याण।
देशभक्ति अर्पण वतन, सदा राष्ट्र निर्माण।।
ध्वजा तिरंगा शान हो , हो जीवन सम्मान।
नया सबेरा जिंदगी , रोग शोक अवसान।।
हरी भरी धरती रहे , स्वच्छ प्रकृति संसार।
रोग मुक्त जन मन वतन, सकल विश्व परिवार।।
भारत हमारी आत्मा , हम भारत शृङ्गार।
सौ जन्म बलिदान भी , कम भारत उद्धार।।
कवि निकुंज अभिलाष मन,अर्पण जीवन देश।
फैले खुशियाँ चहुँदिशा , समरसता संदेश।।
डॉ. राम कुमार झा "निकुंज" - नई दिल्ली