जयराम यादव - नालिया, कच्छ (गुजरात)
शिक्षा का उपवन - कविता - जयराम यादव
मंगलवार, जून 30, 2026
चलो चलें हम अपनी कक्षा, जहाँ चहकते बच्चे प्यारे,
शिक्षा का उजियारा फैला, चमके जैसे चाँद-सितारे।
चलो चलें हम अपनी कक्षा...
मर्यादा में रहना सीखें, अनुचित कभी न कहना,
अनुशासन की राह पकड़कर, शांत चित्त से रहना।
सीखेंगे हम हँसते-गाते, मिलकर क़दम बढ़ाएँगे,
अपनी इस सुंदर शाला को, ख़ुशियों से महकाएँगे।
चलो चलें हम अपनी कक्षा...
खेल-कूद और कला-शिल्प से, मिटे पढ़ाई का हर बंधन,
सीख सहज हो जाएगी जब, साथ जुड़ेगा मनोरंजन।
मन की खिड़की जब खुलेगी, नया सवेरा आएगा,
ज्ञान का पाकर मीठा अमृत, हर बच्चा मुस्काएगा।
चलो चलें हम अपनी कक्षा, जहाँ चहकते बच्चे प्यारे,
शिक्षा का उजियारा फैला, चमके जैसे चाँद-सितारे।
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