विश्व गुरु: भारत - कविता - देवेंद्र मणि पाण्डेय

विश्व गुरु: भारत - कविता - देवेंद्र मणि पाण्डेय | Hindi Kavita - Vishwa Guru Bharat - Devendra Mani Pandey
मेरे भारत वासियों, इस जग को  फिर से राह दिखाओ।
ज्ञान–योग और पराक्रम से, भारत माता का मान बढ़ाओ।

जहाँ वेदों की वाणी गूँजे, उपनिषदों का सत्य बसे।
जहाँ राम-कृष्ण की मर्यादा से, दिव्य भारत की भूमि सजे।
जहाँ बुद्ध, महावीर, नानक के उपदेशों से, मानवता मिशाल बनी।

जिस मिट्टी में चाणक्य का चिंतन, विवेकानंद का संदेश बसा।
जिसने दुनिया को योग सिखाकर ,जीवन को आनंद किया।

वसुधैव कुटुम्बकम् का नारा देकर, संपूर्ण जगत को धन्य किया।
अहिंसा का पथ दिखाकर, मानव मन को निर्मल किया।

हम सब मिल संकल्प करें, स्वर्णिम भारत का मनन करें।
विज्ञान, संस्कृति और संस्कार की धारा, सम्पूर्ण जगत में ख़ूब बहाए।

जब प्रगति की नदियाँ बहती हैं, तब नवाचार  की भावना उठती है।
युवा शक्ति के उमंग-तरंग से, खिल रही है भारत भूमि।
  
विश्व मंच पर उभरता भारत, मानवता का पाठ पढ़ाए।
विश्व गुरु बनने का सपना, पूरा होने का मार्ग दिखाए।

देवेंद्र संग मिल सब प्रण करें, नव भारत का वरण करें।
ज्ञान, करुणा व श्रम-पराक्रम से, अपना भारत महान बनाए।

देवेंद्र मणि पाण्डेय - गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

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