सुनीता प्रशांत - उज्जैन (मध्य प्रदेश)
वसंत ऋतू - कविता - सुनीता प्रशांत
शनिवार, फ़रवरी 15, 2025
हुई है कुछ आहट-सी
रुन झुन करती आई हवा
जागी है कोई उमंग-सी
गगन भी है मुसकाया
पीत वसन धरे धरा ने
कलियों से शृंगार किया
भ्रमर, पपिहा लगे गुनगुनाने
कोकील ने पंचम सुर लगाया
डोल रही खेतों में बाली
पंछी कर रहे कलरव गान
नव सर्जन में सजी प्रकृति
सुनहरे परिधान में आया विहान
हुए सुरभित वन उपवन
निसर्ग है भरमाया
इला का लिए ये स्वरूप
ऋतु वसंत देखो आया
फागुन खड़ा चौखट पर
मानव मन हर्षाया
हर्षोल्लास का संदेश लेकर
वसंत उत्सव आया।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

