पहले हर समझौता करना पड़ता है - ग़ज़ल - सालिब चन्दियानवी

अरकान : फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा
तक़ती : 22  22  22  22  22  2

पहले हर समझौता करना पड़ता है,
तब रिश्तों को पक्का करना पड़ता है।

झूठी तारीफ़े करने से कुछ पहले,
अपने मुँह को कड़वा करना पड़ता है।

मर कर ज़िंदा रहना कुछ आसान नहीं,
सबके दिल पर क़ब्ज़ा करना पड़ता है।

अख़बारों की सुर्ख़ी बनने वालों को,
अपनी जेब से ख़र्चा करना पड़ता है।

कुछ वोटों के लालच में इस जनता से,
झूठा-मूठा वादा करना पड़ता है।

झूठी मसनद पाने वालों को अपने,
आक़ाओं को सज्दा करना पड़ता है।

घर का मुखिया घर की ख़ातिर जाने है,
क्या उल्टा क्या सीधा करना पड़ता है।

सालिब चन्दियानवी - हापुड़ (उत्तर प्रदेश)

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