डॉ॰ एल॰ सी॰ जैदिया 'जैदि' - बीकानेर (राजस्थान)
ग़म छुपाते रहे मुस्कुराते रहे - ग़ज़ल - डॉ॰ एल॰ सी॰ जैदिया 'जैदि'
बुधवार, सितंबर 28, 2022
अरकान : फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
तक़ती : 212 212 212 212
ग़म छुपाते रहे मुस्कुराते रहे,
दिल फिर भी हम लगाते रहे।
हमारी ये दिवानगी भी देखो,
तुम को पाके हम इतराते रहे।
दिल-ओ-जान से चाहा तुम को,
बेसबब तुम हो कि रुलाते रहे।
हम पागल इस क़दर प्यार मे,
तुम बेवफ़ा हो कर डराते रहे।
कहीं छोड़ न दो साथ हमारा,
अक्सर सोच के घबराते रहे।
रुसवाई से तेरी बच के 'जैदि',
ख़ुद को ख़ुद से ही जलाते रहे।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

