रुचा विजेश्वरी - उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
मेरे बच्चों! - कविता - रुचा विजेश्वरी
सोमवार, अगस्त 01, 2022
मेरे बच्चों!
जब तुम
मेरी उम्र में पहुँचोगे,
घर के साथ सुनने पड़ेंगे ताने समाज भर के...
तुम सुनने की आदत डाल लेना, तुम्हे मिलेंगे कइयों प्रपोजल
तुम हवस
और प्रेम की
पहचान रखना
जब तुम बढ़ती जाओगी
लोग तुम्हारे अतीत को
खगालेंगे,
तुम्हारी कमज़ोरियों पर
तंज कसेंगे
लेकिन तुम बढ़ती जाना
अपनी ज़िंदगी के फीके पड़े हिस्से में
रंग भरने के लिए।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

