केवल जीत सिंह - मोहाली (पंजाब)
आख़िरी रिश्ता - कविता - केवल जीत सिंह
सोमवार, अगस्त 02, 2021
आदमी का आख़िरी रिश्ता
उन पेड़ की लकड़ी से
होता है जिनकी आग़ोश
में, जलकर इस तन को
राख होना है।
रिश्ता निभाने का सलीक़ा
तो उन पेड़ की लकड़ी को
आता है जो शव शैय्या पर बिछ कर,
ख़ुद जल के समा लेती है
देह को अपने साथ भस्म की ढेरी में।
इक मलाल रह जाएगा
चिता की लकड़ी को देख
ना पाऊँगा... ना ही शुक्रिया
अदा कर पाऊँगा,
उन लकड़ी का जिन्होंने आख़िरी वक़्त में हमें
संभाला है।
हर शख़्स का नाम लिखा
होता है उन अनजान,
अज्ञात लकड़ी पर जिस में जल के उसे स्वाह होना है,
जिस से उसका आख़िरी
रिश्ता होता है।
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