योग करे हमें निरोग - गीत - डॉ. अमृता पटेल

मन की कुलांचे, योगी ही जाँचें 

काया की माया में है, नमन का अधिकार।
काया को क्षीण कर, मन पैदा करे विकार।।
काम, क्रोध, मद, लोभ को पा कर, खिल जाती हैं इसकी बाँछें।
मन की कुलांचे...

जब तन हो जाए पस्त, मन हो जाता है मस्त।
बुद्धि, ज्ञान और योग से, मन पा जाता शिकस्त।
कर्म योग और ध्यान क्रिया से योगी जैसा चाहे, मन वैसा नाचे।
मन की कुलांचें...

योग करो, व्यायाम करो।
प्रात काल निज ध्यान करो।
बल, बुद्धि, विवेक बढ़ाए योग आत्मा को बाचे।
मन की कुलांचे...

योग में बहुत भक्ति है और ज्ञान भंडार।
बहुत ऊर्जा विज्ञान है भैया इसमें शक्ति अपार।
आओ मिल कर सब योग करें, हो जाए अच्छी दिन और रातें।
मन की कुलांचे...

डॉ. अमृता पटेल - लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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