तिरंगा - कविता - अंकुर सिंह

तिरंगा है मेरी जान,
कहलाता देश का शान।
तीन रंगों से बना तिरंगा,
बढ़ता देश का स्वाभिमान।।

तिरंगे का केसरिया साहस देता,
मध्य श्वेत रंग शांति दिखलाता।
हरा रंग विकास को बतलाता,
तीन रंगों का मेल तिरंगा कहलाता।।

तिरंगे में बना चक्र हमको,
चौबीस घंटे चलना सिखाता।
पंद्रह अगस्त को लाल किले पर, 
छब्बीस जनवरी को राजपथ पर,
लहर तिरंगा हमारी शान दिखाता।।

यारों तिरंगा है हमारी जान,
रखेंगे हम सब इसका मान।
तिरंगे की रक्षा के ख़ातिर,
कर देंगे अपने प्राण क़ुर्बान।।

आओ हमसब मिलकर गाएं,
जन गण मन वाला राष्ट्र गान।।
आपस में जाति-धर्म का मिटाए,
तभी बनेगा हमारा देश महान।।

अंकुर सिंह - चंदवक, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

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