तेरी आँखों में - गीत - गणेश दत्त जोशी

तेरी आँखों में सजा रखा है मैंने ख़्वाबों का संसार।
अब तू चाहे बहा दें मुझे
आँसुओ में, या लगा दे पार।
तेरी आँखों में...

मेरी हर बात तुझसे है
मेरा हर सार तुझसे है
बसता है तुझमें ही
मेरा बेसहारा प्यार।
तेरी आँखों में...

तुम हो तो साँसें चलती
तुमसे दिल ने सीखा है धड़कना
तुम ही तो हो दिल में
तुम ही दिल के पार।
तेरी आँखों में...

फूलों की सुगंध सी तुम
कलियों की थिरकन हो
तुम हो तो मैं हूँ
तुमसे महकता मैं हर बार।
तेरी आँखों में...

मैं गाता भी तुमको
मैं रोता भी तुमको
तुमसे ही तो होती हैं
मेरी आँखें चार।
तेरी आँखों में...

रोम-रोम बसे हो तुम ही
तुम से ही लहू मेरा लाल
तुमको ही गुनगनाता हूँ
बस तुमसे ही तो है प्यार।
तेरी आँखों में...

गणेश दत्त जोशी - वागेश्वर (उत्तराखंड)

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