मिहिर! अथ कथा सुनाओ (भाग १०) - कविता - डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी"

(१०)
बता मिहिर! तत्काल, पलामू राज कहानी।
गद्दी हेतु बवाल, मचा था क्यों बेमानी?
अंग्रेजों से हाथ, मिलाया किसने बोलो?
चेरो सेना साथ, लड़ाई गाथा खोलो।।


आपस में तकरार, शासकों में था भारी।
गद्दी पर अधिकार, हेतु रण नित था जारी।
कभी भोगता संग, हुई चेरों की अनबन।
मचा दिए हुड़दंग, कभी घटवाल जनार्दन।।


समय देख अंग्रेज, चाल चलते अतिकारी।
होने लगी निस्तेज, राज्य में मालगुजारी।
हुए प्रभावित राज्य, पड़े निर्बल थे शासक।
क्षीण पड़ी साम्राज्य, प्रजा गण ताके टकटक।।


हे प्रभु दीनानाथ! मौन मत रहा करो तुम।
विद्रोहों की बात, सविस्तार कहा करो तुम।
झारखण्ड जोहार!, हमें करना सिखलाओ।
ममता करे गुहार! मिहिर! अथ कथा सुनाओ।।


डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी" - गिरिडीह (झारखण्ड)


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