श्याम "राज" - जयपुर (राजस्थान)
मिट्टी के दीये - कविता - श्याम "राज"
मंगलवार, अक्टूबर 20, 2020
दीप जलाओ खुशियों के
मिटा दो अंधियारे दिलों के
देखो ! आ गई है दिवाली
फिर खुशियों की बारात ले के
रंग रोगन देखो सब पुराने हुए
चलो फिर से नया करते हैं
खुद भी हँसते, सबको हँसाते हैं
ले आना तुम भी इस दिवाली को
मिट्टी के दीये, तेल, रूई की बाती को
छोड़ लडिया थडिया लाल पीली गुलाबी को
अब तक पैसें वालों से बहुत खरीदें
चलो ! इस बार खरीदें अम्मा से
जो बैठी है सुबह से चौराहे पर
ले मिट्टी के दीये
मोल-भाव यहां तुम मत करना बस
दो रूपये का है एक दीया..।।
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