महेश कटारे "सुगम" - बीना (मध्यप्रदेश)
नहीं भैये - ग़ज़ल - महेश कटारे "सुगम"
शनिवार, अक्टूबर 17, 2020
ये गजल वो ग़ज़ल नहीं भैये
जिस्म सूरत शकल नहीं भैये
बात महबूब की नहीं इसमें
कल्पना की फसल नहीं भैये
इसके शेरों की तख्तियां मत कर
इसमें उर्दू दखल नहीं भैये
हम ज़रूरत की बात करते हैं
कोई साजिश या छल नहीं भैये
कथ्य पर शिल्प कर दिया कुरबाँ
जब मिला और हल नहीं भैये
तुम ग़ज़ल इसको गर नहीं मानो
तो भी हां कोई गल नहीं भैये
शिल्प को चाट लें या चूमें हम
कथ्य जब तक सफल नहीं भैये
काम जो भी किया है पुख्ता है
काम यह भी सरल नहीं भैये
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर

