मोहम्मद मुमताज़ हसन - रिकाबगंज, टिकारी, गया (बिहार)
महबूबा से मुलाकात हो गई - ग़ज़ल - मोहम्मद मुमताज़ हसन
शुक्रवार, अक्टूबर 23, 2020
दिन डूब गया स्याह रात हो गई!
शहर में आज बरसात हो गई!
बारिश ने हवाओं से कुछ कहा,
दिल से दिल की बात हो गई!
यादों के जब खुले झरोखे,
महबूबा से मुलाकात हो गई!
खिलने लगी उम्मीद की किरणें,
मिलन की अपनी रात हो गई!
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