नव वर्ष - कविता - दीपा पाण्डेय

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत करने
असंख्य रश्मियाँ आई हैं,
जूही, बेला, चम्पा, चमेली
माला पिरोकर लाई हैं।

नवल वर्ष के नव प्रभात तुम
जीवन मंगलमय कर दो,
वीणापाणि तुम वीणा बजाकर
जग को ज्ञान से दीपित कर दो।।

हिमगिरि के हिमशैल शिखर भी
निस-दिन शीश झुकाते हैं,
पादप, पल्लव, पत्र-पुष्प भी
मन्द-मन्द मुस्काते हैं।
नवल वर्ष के नव प्रभात तुम...

सप्त सुरों की राग रागिनियाँ
मधुर संगीत सुनाती हैं,
धरा भी धानी चूनर ओढ़े
थाल सजाकर लाती हैं।
नवल वर्ष के नव प्रभात तुम...

गंगा जैसी पावन नदियाँ
काशी से जलकण लाती हैं,
नव वर्ष तुम्हारे स्वागत में
शिव की महिमा बतलाती हैं।
नवल वर्ष के नव प्रभात तुम...
 
दीपा पाण्डेय - चम्पावत (उत्तराखंड)

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