के॰ पी॰ सिंह 'विकल' - पंतनगर (उत्तराखंड)
चलाे चले हम कसम ये खालें - ग़ज़ल - के॰ पी॰ सिंह 'विकल'
मंगलवार, जनवरी 17, 2023
अरकान : मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन मुफ़ाइलातुन
तक़ती : 12122 12122 12122 12122
चलाे चले हम कसम ये खालें, कि हर किसी से वफ़ा करेंगे,
कभी किसी काे न देंगे दुख ही, न हम किसी से दग़ा करेंगे।
न हाे किसी के भी दिल मे नफ़रत, अमन सदा ही रहे जहाँ मे,
भला हमेशा हाे हर किसी का, यही ख़ुदा से दुआ करेंगे।
चमन मे फिर से ही गुल खिलेंगे, यक़ीन मानाे ये बात तय है,
कि बाद इसके हम हर किसी के, गले मिलेंगे मज़ा करेंगे।
जाे साथ तू है ताे फिर कमी क्या, जहाँ की दाैलत है साथ मेरे,
बसा के दिल में तुम्हारी सूरत, हमेशा पूजा किया करेंगे।
सफ़र भले ही कठिन हाे कितना, कि चाँद की राेशनी ढली हाे,
तुम्हारी यादाें के जुगनूँ लेकर, अँधेराे में हम चला करेंगे।
रहेगी काेशिश सदा यही बस, हर एक घर मे ही राेशनी हाे,
अँधेरे घर की भी देहली पर, चराग़ बन कर जला करेंगे।
दुखाें का सागर हाे ज़िंदगी में, सफ़र कठिन हाे भले ही कितना,
कभी भी दुख काे न लेंगे दिल पर, ग़माे मे भी हम हँसा करेंगे।
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