विकाश बैनीवाल - भादरा, हनुमानगढ़ (राजस्थान)
वीरों को सलाम लिखूँ - कविता - विकाश बैनीवाल
गुरुवार, जनवरी 28, 2021
जब चाहे लिखूँ सुबह या शाम लिखूँ,
वीरों का शौर्य यारो मैं सरेआम लिखूँ।
कुछ भी लिखूँ कविता-ग़ज़ल लिखूँ,
हर एक शब्द मैं वीरों के नाम लिखूँ।
डायरी के हर एक पन्ने पर पैग़ाम लिखूँ,
कहीं भी लिखूँ क़ुर्बानी के कलाम लिखूँ।
जय हिंद, जय भारत, व इंकलाब लिखूँ,
दिल से क्रांतिकारियों को सलाम लिखूँ।
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