संदेश
मिहनत की किलकारियाॅं - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
उषाकाल खिलती किरण, ख़ुशियाँ ले भू धाम। मिहनत की किलकारियाॅं, प्रकृति हॅंसी अभिराम॥ फैली चहुँ दिस लालिमा, नव प्रभात अरुणाभ। उद्योगी म…
वक़्त का परिंदा - कविता - जयप्रकाश 'जय बाबू'
वक़्त का परिंदा आया, ना जाने किस देश से हो, यह सिखलाए सत्य ईमानदारी प्रेम का वेश हो। एक ही देश है, एक ही राग, एक ही गान हमारा, एक ही लह…
जीवन पल दो पल - कविता - विजय कुमार सिन्हा
ज़िंदगी में हर पल लिखा जाता है एक नया तराना, कभी सूरज की तपती धूप कभी चाँदनी की शीतलता। बीत रहा ज़िंदगी का हर पल आश में, विश्वास में,…
ईर्ष्या-निन्दा त्याग दो - कुण्डलिया छंद - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
ईर्ष्या-निन्दा त्याग दो, कबहुं न राखो पास। निन्दा से प्रभुता घटै, ईष्या उपजै रास॥ ईर्ष्या उपजै रास, अरे! निन्दा से दूरी। दोनों मन के द…
देना है इनकम टैक्स - कविता - गणपत लाल उदय
रह जाएगा सब कुछ एक दिन यही पर मेरे यारों, इस धन और दौलत को कोई इतना नहीं सवारों। देना है इनकम टैक्स प्रत्येक साल नियम बनालों, न करो च…
माँ - कविता - नृपेंद्र शर्मा 'सागर'
माँ का क़र्ज़ भूल ना जाना बचपन याद करो, अपना फ़र्ज़ भूल ना जाना बचपन याद करो। ममता ने जब छाँव करी जब कड़ी धूप छाई, निज आँचल में छिपा लिया ज…
सादगी - मनहरण घनाक्षरी छंद - रमाकांत सोनी 'सुदर्शन'
सत्य शील सादगी हो, ईश्वर की बंदगी हो। आचरण प्रेम भर, सरिता बहाइए। संयम संस्कार मिले, स्नेह संग सदाचार। शालीनता जीवन में, सदा अपना…
हित-अहित - कविता - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
आपसी संबंधों का तोड़ना नहीं है आपके हित में मित्रता तोड़ना नहीं है आपके हित में आना जाना बंद करना नहीं है आपके हित में जीवन छोटा है क…
पुष्टिकारक बाजरा - गीत - उमेश यादव
सर्वश्रेष्ठ पोषक शरीर का, नियमित इसको खाएँ। पुष्टिकारक बाजरे को हम, भोजन में अपनाएँ॥ सर्वगुण संपन्न अन्न यह, बल आरोग्य बढ़ाता है। हृष्…
प्रज्वलित कर लो दीप सत्य का - कविता - गोकुल कोठारी
कितना घना हो चाहे अँधेरा, एक दीप से डरता रहा है, हारा नहीं जो अब तक तमस से, हर जलजले में जलता रहा है। कहता है सूरज से आँखें मिलाकर, अग…
रामराज्य - कविता - अखिलेश श्रीवास्तव
नौजवान इस देश के अब एक नया इतिहास रचाएँगे, भ्रष्ट ग़ुंडे अपराधी लोगों को अब नेता नहीं बनाएँगे। एक अखंड भारत की घर-घर में अलख जगाएँगे,…
अपना सुधार सर्वोत्तम सेवा - कविता - उमेश यादव
अपना सुधार सर्वोत्तम सेवा, सुखमय घर संसार है। स्वयं बदलना मानवता पर, बहुत बड़ा उपकार है॥ समझें मन के भावों को हम, सही मार्ग अपनालें। …
लफ़्ज़ों के फूलें - कविता - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
लफ़्ज़ों के फूलें मनभावन, आनंद सकल सुख देता है। नव प्रभात अरुणिम मुस्कानें, मधुरिम मिठास दे जाता है। लफ़्ज़ों का रस अनमोल सुखद, संत…
पशुओं से भी कर प्यार तू - कविता - हनुमान प्रसाद वैष्णव 'अनाड़ी'
है अगर ज़िंदा मनुजता तो सहज स्वीकार तू। इन्सानों से ही नहीं पशुओं से भी कर प्यार तू॥ पूछते है आज तुझसे खेत और खलिहान यह। पूछती पगडण्…
बालहठ - कविता - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
मर्यादा को लाँघ जाता है बालहठ, उसे बढ़ने दो समय के अनुसार, उन्हें रोक देना जब सीमा का अतिक्रमण हो, उनमें आकाश छूने की चाहत है आपको चा…
आदमी ज़िंदा है - कविता - संजय राजभर 'समित'
मौन रहना– आमंत्रण है शोषण का द्योतक है कायरता का। कभी-कभी एक ग़ुस्सा है एक गंभीर ज्वालामुखी का फटने पर विनाश। कुछ भी हो दोनों में …
कृष्ण होना आसान नहीं किंतु नामुमकिन भी नहीं - लेख - सुनीता भट्ट पैन्यूली
ऐसा क्यों है कि बहुत सारे लोग मुझे जान नहीं पाते हैं?श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण ने कहा है। ऐसा इसलिए है शायद हम अपनी भौतिकता में…
चलो प्रेम का दिया जलाएँ - कविता - रमाकान्त चौधरी
नफ़रत का अँधियार मिटाएँ, चलो प्रेम का दिया जलाएँ। आग स्वार्थ की लगी हुई है, संवेदना मरी हुई है। कोई किसी का हाल न पूछे, बेगैरत क…
विषय, विचार और कामनाओं से मुक्ति ही स्वतंत्रता है - लेख - आर॰ सी॰ यादव
नीतिगत निर्णय लेना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। यह एक ऐसी नैसर्गिक प्रतिभा जिसके बिना पर मनुष्य अपने गुण-अवगुण, यश-कीर्ति, हानि-लाभ और …
अपनी खोल से निकलकर - कविता - सूर्य मणि दूबे 'सूर्य'
कभी अपनी खोल से निकलकर, किसी के मन में झाँक कर देखो। किसी के दुख दर्द को, मन की आँखों से आँक कर देखो। उनकी परिस्थितियों में जाकर, एक प…
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