संदेश
लता मंगेशकर - लेख - सुनीता भट्ट पैन्यूली
जब कभी मुझे जीवन की अद्भुत और अलहदा अनूभूति ने भाव-विभोर किया मुझे उस आवाज़ का आलिंगन महसूस हुआ। जब कभी दुख की काहिली सी परछाई ने मेरे…
बहुत दिनों के बाद - कविता - प्रवीन 'पथिक'
बहुत दिनों के बाद, लगता है ऐसे; जैसे ज़िंदगी का दायरा सिमट गया हो एक छोटी बूॅंद में। मेघों की भीषण गर्जना, सिसकियों तक; हो गई हो सीमित।…
मधुर स्मृति - कविता - राजेश 'राज'
अत्यंत लघु परन्तु अविस्मरणीय अकीर्तित प्रेम की लंबे अंतराल के बाद एक प्रणय कहानी फिर याद आई। अब भी उतनी ही असहिष्णु, अव्यक्त अल्पजीवी …
तुम हो, तुम्हारी याद है - कविता - प्रवीन 'पथिक'
तुम हो, तुम्हारी याद है और क्या चाहिए! दिल में एक जज़्बात है, और क्या चाहिए! हृदय में उमड़ता सागर है, बहते ख़्वाबों के झरने हैं। तुझे …
तोतली ज़ुबान वाला हर्ष - संस्मरण - डॉ॰ शिवम् तिवारी
"तातू, तातू, आ गए मेरे तातू" सर पर बेतरतीब बिखरे बाल, बदन पर पुरानी टी-शर्ट एवं अधफटी नेकर पहने महज़ 5 बरस का बालक हर्ष मुझे …
प्रेम और उसकी यादें - कविता - मयंक मिश्र
प्रेम... वही जिसके सिर्फ़ उदाहरण होते है, क्योंकि प्रेम की नहीं होती हैं परिभाषाएँ! जैसे, मेंढकों को बोलने के लिए ज़रूरी होती है बरसात…
तब याद तुम्हारी आई - कविता - ज्योत्स्ना मिश्रा 'सना'
जब झूमी कहीं बयार घटाएँ नभ में छाईं, तब याद तुम्हारी आई निंदिया की गोदी में सोई स्वप्नो से नाता जोड़ लिया, स्मृतियाँ जागी अंतर की आशा …
यादें - कविता - जितेंद्र रघुवंशी 'चाँद'
है तू नाराज़ तो ये भी सही है। इसी बहाने यादें तेरी आई, यादें जो कई है।। लेकिन, बताया नहीं क्यों नाराज़ है, ये भी अच्छा है, छिपा रहे राज़ …
बड़ा मज़ा आता था - कविता - अखिलेश श्रीवास्तव
बचपन के दिनों में दोस्तों के साथ मिलकर शरारतों को करने में बड़ा मज़ा आता था। बचपन के खेल-खेल में अपने दोस्त की ढीली पैंट नीचे निपकाने …
यादों की बारात सजाऊँ - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
यादों की बारात सजाऊँ, बचपन फिर लम्हें जी पाऊँ। माता की ममता छाया तल, पा सुकून फिर से सो जाऊँ। बाबूजी भय से सो जाऊँ, किताब खोल स्वमन बह…
जब भी मैं तुम्हें याद करती हूँ - कविता - शालिनी तिवारी
तुम्हें पता हैं जब भी मैं तुम्हें याद करती हूँ, तो ऐसे ही तुम्हें ख़त लिखने लगती हूँ। और साथ ही ख़ुद से यह वादा भी करती हूँ कि हमेशा इन …
मैं रहूँ न रहूँ याद रखना मुझे - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
मैं रहूँ न रहूँ याद रखना मुझे, दिली ख़्वाबों में रख जिआ हूँ तुझे। माना शरारत किया है जो तुमसे, दिलों जान शबनम हूँ चाहा तुझे। बेइन्त…
बहुत याद आते हैं - कविता - जयप्रकाश 'जय बाबू'
वो काग़ज़ के नाव वो अमरा के छाँव वो अखाड़े का दाँव वो जाड़े का अलाव बहुत याद आते हैं। वो गिल्ली औ डंडे वो लहराते सरकंडे वो डुगडुगी का ए…
तेरी यादें - कविता - रेखा टिटोरिया
यादों के गलियारे से जब भी पीछे जाती हूँ तेरी यादें तंग करती हैं। यादों के तानो बानो से कभी उधेड़ूँ कभी बनूँ इन उलझे सुलझे धागों में जब…
छोड़ चले हैं बाबूजी - गीत - प्रवीन 'पथिक'
जीवन के सूने आँगन में, यादों की पतझड़ है छाई। एक दिवस ऐसा न गुज़रा, जिस रोज़ उनकी याद न आई। कर अनाथ हम माँ बेटे को, मुख मोड़ चले हैं बाब…
तू जीवन की वो स्मृति है - कविता - राघवेंद्र सिंह
तू जीवन की वो स्मृति है जिसकी विस्मृति भी स्मृति है। इन नयनों के सजल सिंधु में तू ही सुंदर सरल कृति है। दृग जल तेरे अनुयायी हैं तू ही …
यादों का बसंत - कविता - ज्योत्स्ना मिश्रा 'सना'
रविवार की अलसाई सुबह जाग रही थी तेरी यादों के संग खिड़की से ताका तो तुम्हारी सहेली मिली... वो बसंत की शोख-सी चंचल सुबह... गोया तुम्हा…
ठंड का मौसम यादें तेरी आती बहुत हैं - ग़ज़ल - भगवती प्रसाद मिश्र 'बेधड़क'
अरकान : फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ऊलुन तक़ती : 22 22 22 22 22 122 ठंड का मौसम यादें तेरी आती बहुत हैं, तेरी खट्टी-मीठी बातें …
वो ज़माना याद है - गीत - रमाकांत सोनी
वो हंसी पल वो तराना सुहाना याद है, हम मिले थे आपसे वो ज़माना याद है। खिल उठा था चमन चहक उठी वादियाँ सभी, ख़ुशियाँ बरस पड़ी महक उठी बगिया…
डाँट - संस्मरण - महेन्द्र 'अटकलपच्चू'
मुझे याद है आज भी वो दिन जिस दिन मेरे पिताजी ने बुरी-बुरी गालियाँ देकर घर से निकल जाने को कहा था। बेरोज़गार था काम-धाम करता नही था। ऊपर…
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