संदेश
मैं नारी हूँ - कविता - गणेश भारद्वाज
दे दो सम अधिकार मुझे भी, पथ में आगे बढ़ने दो न। चढ़ जाऊँगी कठिन चढ़ाई, साथ मुझे भी चलने दो न। मैं नारी हूँ पूरक तेरी, समता को स्वीकार …
त्रिया - कविता - पायल मीना
क्यों मूक बन बैठी है क्यों सह रही है नृशंसता के धनी मानुषों का व्यभिचार क्यों सिला तुमने स्वयं के अधरों को क्यों पड़ी हो तुम क्लांत, …
नारी - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
नवदुर्गा नवशक्ति है, सुता वधू प्रिय अम्ब। लज्जा श्रद्धा पतिव्रता, नारी जग अवलम्ब॥ करुणा ममता हिय दया, क्षमा प्रेम आगार। प्रतिमा नित…
मैं नर के उर की नारी हूँ - कविता - ईशांत त्रिपाठी
मैं नर के उर की नारी हूँ, कुंठित व्यथित दुखारी हूँ, अधिकारों की हनन कथा को, वर्णित करके हारी हूँ, मैं नर के उर की नारी हूँ। संवेदन का …
नारी तू अविचल है - कविता - जितेन्द्र शर्मा
नारी! तू अविचल है। पंकज सी कोमल है पर दृढ़ है तू गिरिवर सी, सागर सी गहरी है पर लहरों सी चंचल है, नारी! तू अविचल है। कुल वंश का मान है …
नारी उत्पीड़न - कविता - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
नारी की नियति अस्मिता पर, जब प्रश्न उठा तुम मौन हुए। जीवन भर बंदिश में रहना, तुम कहने वाले कौन हुए। सदा प्रताड़ित होती नारी, क्या उसका …
गांधी जी और स्वतंत्र भारत की स्त्री - लेख - सुनीता भट्ट पैन्यूली
गांधी जी का जीवन-दर्शन आश्रय स्थल है उन जीवन मूल्यों और विचारों का जहाँ श्रम है, सादगी है सदाचार है, आत्मसम्मान है, सत्य है, अहिंसा है…
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