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विधा/विषय "एहसास"
एहसास - कविता - श्रवण निर्वाण
बुधवार, दिसंबर 02, 2020
यार! मुझे तो दूर तक जाना था तेरे साथ मेरा अन्तर्मन टूट गया, क्यों छुटा साथ। शेष रह गई बहुत सी मेरे मन की बातें कई बार कटती है, जागते ह…
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