संदेश
विधा/विषय "अमर"
अमर हुए जाँबाज़ - कुण्डलिया छंद - डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी"
मंगलवार, अप्रैल 06, 2021
सुकुमा की धरती हुई, आज रक्त से लाल। परिजन सारे रो रहे, होकर के बेहाल।। होकर के बेहाल, तड़पते घायल सैनिक। ज़ालिम चलते चाल, हया भी आज गई ब…
अमरत्व - कविता - वर्षा श्रीवास्तव
सोमवार, जनवरी 18, 2021
देवता अमर होना चाहते थे, असुर भी मरना नहीं चाहते थे सृष्टि के संतुलन के लिए अच्छे को ज़िन्दा रहना था। आख़िर देवता अमर हो गये किन्तु मनुष…
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विशेष रचनाएँ
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